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भारतीय राजनीति - भारत का संवैधानिक विकास भाग - 2


भारतीय राजनीति (Indian Politics)




  भारत का संवैधानिक विकास भाग - 2  



 1909 के एक्ट ने विधायिका के सदस्यों के निर्वाचन की व्यवस्था करते हुए पृथक तथा सांप्रदायिक निर्वाचन पध्दति का प्रावधान किया |

20 अगस्त 1917 को सरकार ने भारत में उत्तरदायी व प्रतिनिधित्वपूर्ण शासन स्थापित करने की अपनी नीति की घोषणा की |

मान्टेयु – चेम्सफोर्ड सुधार योजना को 8 जुलाई 1918 में प्रकाशित किया गया |

1919 के एक्ट द्वारा केंद्र में प्रथम बार दो सदन वाली संस्था का गठन किया गया |

1919 के एक्ट ने प्रान्तों में द्वैध शासन की स्थापना की |

साइमन कमीशन की नियुक्ति 8 नवम्बर 1927 को की गई. कमीशन 3 फरबरी से 31 मार्च 1928 तथा 11 अक्टूबर 1928 से 13 अप्रैल 1929 तक भारत में रहा |

31 अक्टूबर 1929 को इरविन ने घोषणा की थी की भारत की प्रगति का संवैधानिक लक्ष्य डोमिनियन स्टेटस की प्राप्ति. ये कमीशन 1919 के अधिनियम की समीक्षा 3 हेतु आया था |

फरबरी 1928 को दिल्ली में आहूत सर्वदलीय सम्मेलन ने देश के लिए संविधान बनाने हेतु एक कमिटी का गठन हुआ इसके अध्यक्ष मोतीलाल नेहरु थे कमेठी ने अपनी रिपोर्ट में भारत के लिए डोमिनियम स्टेटस की मांग की |

12 नवंबर 1930 से 19 जनवरी 1931 तक की द्वितीय गोलमेज परिषद में कांग्रेस के एक मात्र प्रतिनिधि के रूप में गाँधी ने भाग लिया |

10 अगस्त 1932 के कम्युनल अवार्ड ने हरिजनों को पृथक मताधिकार का अधिकार दिया इसके विरुध्द गाँधी ने 20 अगस्त को आमरण अनशन आरम्भ कर दिया |

25 सितम्बर 1932 के पूना एक्ट में हरिजनों के प्रथक निर्वाचन के स्थान पर स्थानों के आरक्षण का सिध्दांत लागु किया |

1935 के अधिनियम में 321 धारा तथा 10 परिशिष्ट थे |

1935 के अधिनियम ने प्रान्त में द्वैध शासन समाप्त कर दिया किन्तु केंद्र में उसकी स्थापना की |

1935 के अधिनियम में ब्रिटिश भारत व देशी राज्यों को मिलाकर संघ बनाने का प्रस्ताव रखा किन्तु संघीय योजना लागु नही हई |

1935 के अधिनियम ने भारत में संघीय न्यायालय को स्थापित किया |

8 अगस्त 1940 को भारत सरकार ने संवैधानिक सुधार के प्रस्ताव रखे |

11 मार्च 1942 को क्रिप्स मिशन भारत भेजने की घोषणा की गई |

10 जुलाई 1944 को सी. राजगोपालाचारी ने अपना चार सूत्री कार्यक्रम प्रस्तुत किया |

जून 1945 में गवर्नर जनरल वैवेल ने शिमला सम्मेलन आहूत किया सम्मेलन विफल हुआ |

23 मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन भारत आया इसके अध्यक्ष पैथिक लारेंस व अन्य सदस्य अलैक्जेंन्दर तथा क्रिप्स थे मिशन ने अपनी योजना 16 मई को प्रस्तुत की |

24 अगस्त 1946 को नेहरु ने अन्तिम सरकार का गठन किया, लीग 12 अक्टूबर की सरकार में सम्मिलित हुई |

2 जून 1947 को माउन्टबेंटन योजना स्वीकृत हुई |


15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ इस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली थे |   
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भारतीय राजनीति - भारत का संवैधानिक विकास भाग - 1

भारतीय राजनीति (Indian Politics)




  भारत का संवैधानिक विकास भाग - 1   

         रेग्यूलेटिंग एक्ट ने बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बनाकर मद्रास तथा बम्बई प्रेसिडेंसी को उसके नियंत्रण में आंशिक रूप से कर दिया |

       रेग्यूलेटिंग एक्ट ने कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की एलिजा इम्पे कोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये गये |

         1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने इंग्लैंड में भारतीय मामलों के संचालन हेतु बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल की स्थापना की |

         1784 के एक्ट ने बम्बई व मद्रास की प्रेसिडेंसी पर गवर्नर जनरल के पूर्ण नियन्त्रण की स्थापना की |

         1784 में पिट्स इंडिया एक्ट ने गवर्नर जनरल की परिषद के सदस्यों की संख्या घटक 3 कर दी |

         1813 के चार्टर एक्ट से भारतीय व्यापार पर कम्पनी का एकाधिकार समाप्त कर इस चार्टर एक्ट में शिक्षा साहित्य पर 1 लाख रुपया व्यय करने का प्रावधान किया | मिशनरियों को लायसेंस लेकर धर्म प्रचार की छुट |

         1833 के चार्टर एक्ट ने भारत के गवर्नर जनरल के पद का सृजन किया चीन के साथ कम्पनी के व्यापार का एकाधिकार समाप्त किया गवर्नर की परिषद में विधि सदस्य को नियुक्त किया गया प्रथम विधि सदस्य लोर्ड मैकाले था |

        1858 के भारत सरकार अधिनियम ने कम्पनी के राज्य का अंत कर क्राउन की सत्ता को स्थापित किया भारतीय मामलों की देखभाल का अधिकार भारत मंत्री व उसकी 15 सदस्यीय परिषद को दिया गया |

         1861 के सुधार कानून ने गवर्नर जनरल की कार्यकरिणी में 5 वें सदस्य को नियुक्त किया विधि निर्माण कार्य से नामजद गैर सरकारी सदस्यों को जोड़ा प्रान्तों को विधि निर्माण का अधिकार दिया |

         1892 के सुधर कानून ने विधि – निर्माण संस्था में गैर – सरकारी सदस्यों की नियुक्ति हेतु विशुद्ध नामांकन के स्थान पर सिफारिश के आधार पर नामांकन की पध्दति आरम्भ की तथा सदस्यों को सीमित दायरों में प्रश्न पूछने व बजट पर बहस करने का अधिकार दिया |

        इंडिया काउंसलिंग तथा गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी प्रथम बार 1909 के एक्ट के द्वारा की गयी |



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