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जॉर्डन के शाह की भारत यात्रा पर हुए 12 समझौते

जॉर्डन के शाह की भारत यात्रा पर हुए 12 समझौते

जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय की भारत की राजकीय यात्रा के अंतिम दिन 1 मार्च 2018 को दोनों देशों के बीच सामरिक, रणनीतिक और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने हेतु 12 समझौते किए गए -





सहमति ज्ञापनों समझौतों की सूची निम्न है 

(1) रक्षा सहयोग पर सहमति - ज्ञापन 

(2) कूटनीतिक और सरकारी पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा छूट 

(3) सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 

(4) मानव शक्ति सहयोग समझौता 

(5) स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में सहयोग के लिए सहमति ज्ञापन 

(6) जॉर्डन में अगली पीढ़ी के उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए सहमति ज्ञापन 

(7) रॉक फॉस्फेट तथा उर्वरक/एनपीके की दीर्घकालिक सप्लाई के लिए सहमति ज्ञापन 

(8) सीमा शुल्क परस्पर सहायता समझौता 

(9) आगरा और पेट्रा (जॉर्डन) के बीच दोहरा समर्झाता 

(10) आईआईएमसी  तथा  जेएमआई के बीच सहयोग के लिए सहमति ज्ञापन 

(11) प्रसार भारती और जॉर्डन टीवी के बीच सहमति ज्ञापन 

(12) जॉर्डन यूनिवर्सिटी तथा आईसीसीआर के बीच हिंदी पीठ की स्थापना के लिए सहमति ज्ञापन

जॉर्डन के शाह की मुख्य जानकारियां 

अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन 1 999 से जॉर्डन के राजा रहे हैं। अब्दुल्ला के मुताबिक, वह मोहम्मद के 41 वें पीढ़ी के प्रत्यक्ष वंशज हैं क्योंकि वह हस्मिथ परिवार से संबंधित हैं - जिन्होंने 1921 से जॉर्डन पर शासन किया है |

जन्म30 जनवरी 1962 (आयु 56 वर्ष), अम्मान, जॉर्डन
पूर्ण नामAbdullah bin Hussein bin Talal bin Abdullah bin Hussein bin Ali
(जानकारी प्राप्ति का स्रोत विकिपीडिया)
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Current Affairs - शहरी विकास कार्यक्रम में सहयोग के लिए जर्मनी से करार एवं मोरक्को के साथ रेलवे में सहयोग समझौते को स्वीकृति


शहरी विकास कार्यक्रम में सहयोग के लिए जर्मनी से करार


नई दिल्ली में 23 फरवरी 2018 को भारत और जर्मनी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य टिकाऊ शहरी विकास कार्यक्रम में चयनित और स्मार्ट शहरों में शहरी बुनियादी सेवाओं और आवास की उपलब्धता के लिए उपयुक्त अवधारणाएं विकसित करना तथा उन्हें लागू करना है

जर्मनी के तकनीकी सहयोग के उपायों से एकीकृत योजना किफायती आवास तथा बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता के नजरिए से टिकाऊ विकास में सहायता मिलेगी जिससे पानी अपशिष्ट जल और ठोस कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा


मोरक्को के साथ रेलवे में सहयोग समझौते को स्वीकृति


केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 20 फरवरी 2018 को भारत और मोरक्को के बीच रेलवे क्षेत्र में सहयोग के लिए हुए समझौते को मंजूरी दी गई

इस सहयोग समझौते के तहत प्रशिक्षण व कर्मचारियों का विकास विशेषज्ञ मिशन अनुभव और कर्मचारियों का आदान प्रदान तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान सहित तकनीकी सहायता का प्रावधान है

रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालीन सहयोग और साझेदारी विकसित करने के उद्देश्य से सहयोग 
समझौते पर 14 दिसंबर 2017 को हस्ताक्षर किए गए


इजराइल के साथ फिल्मों के निर्माण के समझौते का अनुमोदन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 20 फरवरी 2018 को भारत और इजराइल के मध्य फिल्म निर्माण से जुड़े समझौते को पूर्वव्यापी मंजूरी प्रदान की गई

इस समझौते पर इजरायल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे

फिल्म सिनेमा समझौते से दोनों देशों के नागरिकों के बीच कला एवं संस्कृति सद्भावना निर्माण तथा बेहतर समझदारी को बढ़ावा मिलेगा और फिल्म निर्माण के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर प्राप्त होगा


इसके अलावा कलाकारों तकनीकी व गैर तकनीकी लोगों को रोजगार प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी


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जर्मनी के राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उद्देश्य एवं महत्व


जर्मनी के राष्ट्रपति की भारत यात्रा



जर्मनी के राष्ट्रपति डॉ. फ्रेंक वाल्टर श्टाइन्मायर 22-25 मार्च, 2018 के मध्य भारत की अधिकारिक यात्रा पर रहे. इस यात्रा पर उनके साथ सीईओ प्रतिनिधिमंडल, भारतविदों और मिडिया का एक प्रतिनिधिमंडल भी आया इस यात्रा के दौरान जर्मनी के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय और अन्तराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा की गयी.

जर्मनी के राष्ट्रपति के रूप में यह श्टाइन्मायर की पहली भारत यात्रा थी. उनसे पहले जर्मनी के भूतपूर्व राष्ट्रपति जॉकिम गौक ने फरबरी, 2014 में भारत की यात्रा की थी. श्टाइन्मायर की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण थी, क्योकि 14 मार्च, 2018 को जर्मनी में नई सरकार के शपथ लेने के बाद यह राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी. इस यात्रा के दौरान जर्मन राष्ट्रपति बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, सारनाथ दीनदयाल संकुल भी गये. इसके अलावा गंगा घाटों की सैर की और दशाश्व्मेघ घाट पर गंगा आरती में भाग लिया.

श्टाइन्मायर की पहले की यात्राएँ

डॉ. श्टाइन्मायर विदेश मंत्री और जर्मनी के वाइस – चांसलर के रूप में कई बार भारत का दौरा कर चुके है. वर्ष 2015 में वह चांसलर एंजेला मर्केल के साथ तीसरे अंतर्सरकारी परामर्श में भाग लेने आये थे, इससे पहले डॉ. श्टाइन्मायर सितम्बर, 2014 और नवम्बर, 2008 में भी भारत आ चुके है.

यात्रा का उद्देश्य

जर्मन राष्ट्रपति की इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सम्बन्ध, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा से दोनों देशो के द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त बनाने के उपाय सुझाना था. जर्मनी के साथ भारत के सम्बन्ध द्विपक्षीय और वैश्विक सन्दर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सम्बन्धों में से एक है. इसके अलावा जर्मनी भारत में सातवाँ सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है.

वर्ष 2000 में सामरिक भागीदारी स्थापित होने के बाद से दोनों पक्षों की सरकारों द्वारा इस सम्बन्ध को व्यापक और गहरा करने का प्रयास किया जाता रहा है. ये सम्बन्ध शिखर स्तर के द्विवार्षिक अंतर्सरकारी परामर्श (आईसीजी) में अभिव्यक्त है. कुछ चयनित देशों के साथ ही जर्मनी की भी भारत के साथ सामरिक भागीदारी (Stretagic Partnership) है. आईसीजी के चौथे संस्करण (जो 30 मई 2017 को बर्लिन में आयोजित हुआ) में विभिन्न क्षेत्रों में 12 सहयोग दस्तावेजो पर हस्ताक्षर किये गये थे भारत विश्व के उन चुनिन्दा देशों में से एक है जिनके साथ जर्मनी ने इस प्रकार का वार्ता तंत्र स्थापित किया हुआ है.

जर्मनी, यूरोप (लगभग 82.7 मिलियन-2016) में सबसे अधिक आबादी वाला देश है और महाद्वीप के केंद्र में स्थित होने के कारण स्वाभाविक रूप से यहपूर्वी और पश्चिमी यूरोप के बीच एक पुल की भूमिका निभाता है।यह औद्योगिक रूप से एक उन्नत राष्ट्र है और आधुनिक तकनीकी जानकारी के संयोजन के साथ एक विनिर्माण केंद्र बन गया है।यह अनुसंधान एवंविकासतथा कौशल काएक वैश्विक केंद्र और धुरी है।जर्मनी की ऐतिहासिक उथल-पुथल के बावजूद, यह सफलतापूर्वक यूरोप में विकास के वाहक के रूप में उभरा है।

भारत-जर्मनी में मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग रहा है। जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और विश्व में छठा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जर्मनी के वैश्विक व्यापार में भारत को24वें स्थान पर रखा गया था।जर्मन विशेषज्ञता नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास, स्मार्ट सिटी, पानी और अपशिष्ट प्रबंधन, नदियों, रेलवे आदि की सफाईजैसे अधिकांश क्षेत्रों मेंभारत की मौजूदा प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं,जो मूर्त, परिणाम-उन्मुख परियोजनाओ के लिए सहयोगी हो सकती हैं।

2016-17 में द्विपक्षीय व्यापार 18.76 अरब अमेरिकी डॉलर का था। 2016-17 में, भारत ने जर्मनीको 7.18 अरब अमरीकी डॉलर के सामान का निर्यात किया और जर्मनी से 11.58 अरब अमरीकी डॉलर की वस्तुओं का आयात किया गया।जर्मनी भारत में निवेश करने वाले सबसे बड़ेविदेशी प्रत्यक्ष निवेशकों में सातवें स्थान पर है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2017 तक भारत में संचयी जर्मन एफडीआई 10.71 अरब डॉलर या कुल एफडीआई का 2.91% है।

जर्मनी में 15,000 से अधिक भारतीय छात्र हैं और करीब 800 जर्मन छात्र भारत में पढ़ रहे हैं या अपनी इंटर्नशिप कर रहे हैं। (2017)।जर्मनी में भारतीय नागरिकों की संख्या 108,000 है (जर्मनी का आंतरिक मंत्रालय, 2017) और जर्मनी में पीआईओ की संख्या लगभग 73,000 है, इनमेंमुख्य रूप से तकनीशियन, छोटे व्यवसायी/व्यापारी और नर्सें शामिल हैं।










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UPSC CSE (IAS) मुख्य परीक्षा में प्रभावी उत्तर कैसे लिखें ?

मुख्य परीक्षा में प्रभावी उत्तर कैसे लिखें ?

UPSC परीक्षा के लिए एक सीमित अवधि में संरचित और स्पष्ट सामग्री को ढूंढना, यह एक ऐसा कार्य है जो बहुत ही कठिन है। सटीक होने के लिए आप इतना विशाल पाठ्यक्रम को एक सीमित समय पर पूरा नहीं ज्ञात कर सकते हैं।



मन की ही समझदारी और सहजता आपकी परीक्षा हॉल में, एक सटीक उत्तर लिखने में आपकी मदद कर सकते हैं। इस लेख में, UPSC सिविल परीक्षा में प्रभावी उत्तर लिखने और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर बात करेंगे।

IAS मुख्य परीक्षा में प्रभावी उत्तर लिखने के लिए कुछ स्टडी टिप्स

अपने IAS परीक्षा में अच्छी सामग्री के निर्माण के लिए कुछ चीजों पर ध्यान केंद्रित करने की ज़रुरत है। तो चलिए कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर नज़र डालते हैं “समाचार” पढ़ना और “दुनिया के मामलों” में विशाल ज्ञान प्राप्त करने के अलावा भी कुछ आवश्यक चीजे है जो आपको एक प्रभावी उत्तर लिखने में आपकी मदद कर सकते हैं।

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज

यह पैकेज IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। यह पैकेज अभ्यर्थियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा उनको प्रारंभिक परीक्षा के लिए रणनीत बनाने में सहायता प्रदान करता है तथा साथ ही साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि भी करता है। इस पैकेज में 10 टेस्टों का संकलन किया गया है और प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न हैं | इसके लिए आप प्लेस्टोर से Parmanand Divya Jyoti NGO App डाउनलोड कर सकते है जो आपकी स्टडी में मददगार सिध्द होगा.

जानकारी अर्जित करना

एक सटीक उत्तर लिखने के लिए, जानकारी अर्जित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। गणित सरल रहता है जब तक की आपको उसे हल करने का तरीका मालूम होता है या अगर आपको उसका सही उत्तर नहीं मालूम तो आप इसे सही तरीके से हल नहीं कर सकते हैं। कोई लेखन कौशल या माइंड ट्रिक्स आपको सिविल सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं करवा सकती है। 

अपने दिमाग को प्रशिक्षित और विकसित करने के लिए विभिन्न पुस्तको को पढ़ने की जरुरत है और उनमे से महत्वपूर्ण विषयो पर नोट बनाने की आवश्यकता है। हर जरुरी चीज़ के नोट्स बनाना एक और महत्वपूर्ण कार्य है जब आप UPSC की तैयारी कर रहे हैं। यह रिविज़न के समय में आपका महवत्पूर्ण समय भी बचाएगा।

स्वस्थ वार्तालाप

कभी-कभी अलग-अलग कारणों के चलते किसी विषय पर आपकी राय पक्षपाती बन जाती है। इस तरह की पक्षपाती राय पर आपको खुले दिमाग के साथ अपने दोस्तों और साथियों के साथ चर्चा करनी चाहिए। यह आपको लगता है कि आपका तर्क अन्य लोगों से अलग है परंतु एक स्वस्थ वार्तालाप से आपके मस्तिष्क में उस तर्क को समाहित करने में मदद करेगा। जो आप कही मिस कर रहे होंगे इससे आपको पता चल सकेगा की आपके पॉइंट्स में जो कमी है उसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

स्वयं के शिक्षक बनें

एक अन्य तरीका यह भी है कि आप एक विशेष विषय पर ज्ञान अर्जित कर किसी और व्यक्ति को समझाए, जो उस विषय को समझना चाहता हो और उस विषय पर उसे ज्ञान नहीं।एक तथ्य यह भी है कि आप केवल किसी को तब ही सिखा सकते हैं जब आपको उस विषय से संबंधित पूर्ण जानकारी प्राप्त हो।

अपनी समझ को व्यापक बनाना

एक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आप किसी भी पॉइंट पर गहन अध्ययन करें। इसके लिए अधिक से अधिक स्रोत से विषय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी इकठ्ठा कर उन विषयो पर नोट बना लें। एक सटीक उत्तर लिखने के लिए अपने दिमाग का विस्तार करना एक अच्छा माध्यम है।

मौलिकता और एनॉलिटिक्स की जानकारी

प्रभावी उत्तर के बारे में यह ध्यान रहे कि वे पीस ऑफ केक यानि आसान कार्य नहीं है, उत्तर लिखने के लिए सिर्फ़ बुनयादी ज्ञान प्राप्त होना पर्याप्त नहीं है। अगर आप UPSC के पूर्व प्रश्न-पत्रों को देखेंगे तो आपको मालूम चलेगा कि एक उत्तर के लिए कितनी बुद्धिशीलता और विषयों के विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

UPSC CSE मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए सुझाव

हर एक प्रश्न के लिए उसके सभी तथ्यों और जानकारी का पता कर लेना ही काफी नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात को ध्यान में रखते हुए उत्तर इस प्रकार लिखें कि जैसे वह अपनी मुख्य बात स्पष्ट कर सकें और उत्तर को एक फ्रेम में ढाल सकें। जिससे वह उत्तर पर ध्यान आकर्षित कर सकें। यह एक उत्तर लिखने की सही शैली होती है। उत्तर को आसान सी भाषा, स्पष्ट रूप में लिखना चाहिए। यहां पर ऐसे ही कई अन्य सुझाव दिए गए हैं, जो आपको IAS मुख्य परीक्षा में प्रभावी उत्तर लिखने में आपकी मदद कर सकते हैं। आइए जानते है उन सुझावों को:

पहले 2-3 मिनट में प्रश्न-पत्र को अच्छे से देख लें और उन प्रश्नों का चुनाव करें जो कि आपको आते हो इसे करने के बाद आप उन प्रश्नों को देखें जो अपने पहले छोड़ दिए थे इस बार आप कुछ विश्लेषण कर उन प्रश्नों को हल करने की कोशिश करें।एक उम्मीदवार को अपने प्रवाभी उत्तर के लिए बिंदु प्रारूप अपनाना चाहिए अगर प्रश्न में पैरा प्रारूप की मांग की गई है, तो आपको उत्तर पैरा प्रारूप में ही देना चाहिए।सवाल में उन शब्दों का चुनाव करें जो आपके उत्तर को स्पष्ट करने में मदद कर सके। 

आप एक सरल और स्पष्ट भाषा में, संज्ञा और क्रियाओं का अनावश्यक प्रयोग किए बिना ही अपने उत्तर को पेश करना होगा।आप अपने उत्तर में सब/साइड हैडिंग को शामिल करने के लिए प्रयास करें। “साइड शीर्षक” परीक्षक की दृष्टि को केंद्रित करने में मदद कर सकेगा जो उन बिंदु या पैरा में लिखा है। इस महत्वपूर्ण अंक की ओर जो आप अपने उत्तर में देना चाहते हैं।भारतीय प्रशासनिक सेवा के जीएस पेपर -1, 2 और 3 के उत्तर में निष्कर्ष देना आवश्यक है। 

यह सबसे ज्यादा जरूरी पेपर -2 और पेपर- 3 में है। आप इसकी जगह इन निष्कर्ष शीर्षकों का भी इस्तेमाल कर सकते है जैसे कि ” वे फॉरवर्ड ” या ” फ्यूचर अहेड” ।जहां भी डॉयग्राम की जरुरत हो वह जरूर बनाए विशेष रूप से भारत और दुनिया के नक्शे में या भूगोल और अंतर्राष्ट्रीय संबंध विषयों में आवश्यक है। फ्लो चार्ट और चित्र के सात आप एक संछिप्त स्वरूप में आपने उत्तर को पेश करने के लिए प्रयास कर सकते हैं।

इस प्रकार, यह महत्वपूर्ण है कि आप सवाल स्पष्ट रूप से पढ़े, विषय का विश्लेषण कर सके। अपने अध्ययन के माध्यम से आप जितना जानते हैं उसका उपयोग करें। उम्मीद है कि इस लेख से IAS मुख्य परीक्षा से संबंधित उपयोगी जानकारी आपको प्राप्त हो गई होगी। 

यह आर्टिकल आपको कैसा लगा कमेंट कर के जरुर बताये और ब्लॉग को सब्सक्राइब जरुर करे 

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ई-वाणिज्य को लेकर ब्रिक्स देशो का रुख तथा जी.एस.टी. में ई-वाणिज्य


जी.एस.टी. में ई-वाणिज्य

भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई.) डेलायट की ‘ई-कॉमर्स’ इन इंडिया-ए गेम चेंजर फॉर द इकोनोमी’ शीर्षक में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-वाणिज्य खंड में तेजी से विकास हुआ है, लेकिन कराधान, साजो-सामान, एवं सुविधाओ, भुगतान, इन्टरनेट पहुंच तथा कुशल कार्यबल जैसी कई चुनौतियां भी सामने आयी है.

एक रिसर्च के मुताबिक जीएसटी के क्रियान्वयन से ई-वाणिज्य कारोबार से जुड़े काराधान तथा लाजिस्टिक्स से सम्बध्द विभिन्न मुद्दों के समाधान में मदद मिलेगी. जीएसटी में नियमो को तैयार करते, बनाते समय ई-वाणिज्य सौदों के लिए स्पष्ट परिभाषित नियमो तथा सलाहकार रुख, सरकार के साथ ई-वाणिज्य कम्पनियां दोनों के लिए फायदेमंद होगा. 

इसमें यह भी कहा गया है की समय पर और प्रभावी तरीके से डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया स्टार्टअप इंडिया तथा स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से ई-वाणिज्य व्यावस्था को ग्रामीण क्षेत्रों में इन्टरनेट की अप्रभावी पहुँच तथा कुशल कार्यबल की कमी से जुडी चुनौतियाँ से पार पाने में मदद मिलेगी. रिपोर्ट में इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष करके क्षेत्र समेत कई उपायों की सिफारिश की गई है.

ई-वाणिज्य को लेकर ब्रिक्स देशो का रुख

ब्रिक्स के व्यापार मंत्रियो ने अक्टूबर 2016 में ई-वाणिज्य के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच और अधिक सहयोग का आह्वान किया तथा विश्व बाजार में उभरती अर्थव्यवस्थाओ की मजबूत भागीदारी के लिए व्यापार के मार्ग में गैर शुल्क अडचने दूर किये जाने पर बल दिया.

ब्रिक्स व्यापार मंत्रियो ने व्यापार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरुरत पर बल दिया. पांच सदस्यीय ब्रिक्स समूह ने ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने ब्रिक्स आईपीआर सहयोग प्राणाली (आईपीआरसीएम) गठित किया है. इसके अलावा आईपीआरसीएम को निर्धारित नियम एवं शर्तों पर काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही बेहतर तथा समन्वित तरीके से सहयोग बढाने के प्रयास में तेजी लाने की बात भी कही गई है.

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भारत में ई-वाणिज्य का भविष्य एवं भारत सरकार का इसके लिए प्रयास


ई-वाणिज्य : भारत सरकार का प्रयास


केंद्र सरकार ने मार्च, 2016 में ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी. सरकार बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) ई-कामर्स में पहले ही 100% एफडीआई की अनुमति दे चुकी है. डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क में कंप्यूटर, टीवी चैनल और अन्य इन्टरनेट एप्लीकेशन शामिल है.

सरकार का उद्देश्य देश में और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करना है. औधोगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के दिशा निर्देश में कहा गया है कि माल संगृहीत कर ई-कॉमर्स के जरिये उसकी खुदरा बिक्री के माडल में एफडीआई की अनुमति नही होगी.

गौरतलब है कि वैश्विक ऑनलाइन खुदरा कंपनियों अमेजन और ईबे (e-bay) आदि भारत में ऑनलाइन मार्केट मंच का परिचालन कर रही है इस क्षेत्र में फ्लिफकार्ट और स्नैपडील जैसी घरेलू कंपनियों का निवेश हो रहा है विभिन्न ऑनलाइन रिटेल माडलों में एफडीआई को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नही था. स्पष्टता लाने के लिए डीआईपीपी ने ई-कॉमर्स को इन्वेंटरी यानी माल का भंडार कर किया जाने वाला ऑनलाइन खुदरा कारोबार और खुदरा कारोबार के लिए ऑनलाइन बाजार का मंच चलाने का माडल के रूप में परिभाषित भी किया है.

मार्केट प्लेस माडल से तात्पर्य किसी ई-कॉमर्स इकाई द्वारा डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर आईटी प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है इस माडल में ई-कॉमर्स इकाई क्रेता-विक्रेता के बीच केवल संपर्क की भूमिका निभाएगा.

भारत में ई-वाणिज्य का भविष्य

सर्च इंजन गूगल की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से खरीददारी करने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ने से देश में ई-कॉमर्स बाजार से बिकने वाली वस्तुओ का सकल वस्तु मूल्य वस्तु 2020 तक $ 60 अरब हो जाने का अनुमान है. वर्ष 2020 तक ऑनलाइन दुकानदारो की संख्या बढ़कर 17.5 करोड़ हो जाने की उम्मीद है. यह संख्या वर्ष 2025 तक 53 करोड़ में बदल जाने की उम्मीद है. रोजगार का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनने वाला ई-वाणिज्य भविष्य में 14 लाख नए रोजगार सृजित करेगा.

 
भारतीय डाक का ई-वाणिज्य पर ‘माय स्टाम्प’


भारतीय डाक ने जून 2016 में ई-वाणिज्य पर पहली डाक टिकट ‘माय स्टाम्प’ जारी किया. माय स्टाम्प में ई-वाणिज्य कम्पनी अमेज़न को दर्शाया गया है. डाक विभाग ने यह डाक टिकट अमेजन के साथ भागीदारी के तीन वर्ष पूरे होने पर जारी किया था.

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ई-वाणिज्य के फायदे, ग्राहकों को लाभ तथा ई-वाणिज्य भुगतान प्रणाली



ई-वाणिज्य के फायदे

ई-वाणिज्य के लाभ का मुख्य रूप से दो प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

(1) संगठन (संस्था) को लाभ
(2) उपभोक्ताओ को लाभ

संगठन को लाभ

ई-वाणिज्य के उपयोग से संगठन (संस्था) न्यूनतम पूँजी निवेश के साथ राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपने बाजार का विस्तार कर सकते है एक संगठन आसानी से दुनिया भर में और अधिक ग्राहकों तक अपनी पहुँच बना सकते है.

ई-वाणिज्य संगठन की जानकारी डिजिटल माध्यम द्वारा प्रक्रिया बनाने के लिए लागत को कम करने के लिए, वितरित करने, पुनः प्राप्त करने और प्रबन्धन आधारित जानकारी में मदद करता है

ई वाणिज्य, कम्पनी की ब्रांड छवि में सुधार करता है.

ई-वाणिज्य, बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने के लिए संगठन को मदद करता है. ई-वाणिज व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिये मदद करता है.

ई-वाणिज्य, पेपरलेस व्यवसाय को बढाता है.

ई-वाणिज्य, संगठन की उत्पादकता में वृध्दि करता है.

ग्राहकों को लाभ

यह ग्राहकों के लिए सामग्री 24 × 7 उपलब्ध कराता है. ग्राहक किसी भी समय, किसी भी स्थान से, जहां एक कम्पनी द्वारा प्रदान किसी भी उत्पाद/सेवाओं के बारे में पूछताछ के लिए लेन-देन कर सकते है. यहाँ 24 × 7 एक सप्ताह के प्रतेक सात दिन के 24 घंटे के लिए संदर्भित सेवा मिलती है.

ई-वाणिज्य, उपयोगकर्ता को और अधिक विकल्प तथा उत्पादों को शीघ्र वितरण प्रदान करता है.

एक ग्राहक एक उत्पाद के बारे में समीक्षा टिप्पणियाँ डाल सकते है और खरीद करने से पहले अन्य ग्राहकों की समीक्षा टिप्पणियाँ देख सकते है. ई-वाणिज्य आभासी नीलामी का विकल्प प्रदान करता है.

ई-वाणिज्य आसानी से जानकारी उपलब्ध करता है. एक ग्राहक कई दिनों या हफ़्तों के लिए प्रतीक्षा की तुलना में सेकेंड में प्रासंगिक विस्तृत जानकारी देख सकता है.

ई-वाणिज्य प्रतियोगिता में ग्राहकों के लिए पर्याप्त छूट प्रदान करता है.

 ई-वाणिज्य भुगतान प्रणाली

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पेपरलेस मौद्रिक लेन-देन को संदर्भित करता है. इलेक्ट्रॉनिक भुगतान ने कागजी काम, लेन-देन लागत, श्रम लागत को कम करने से व्यापार प्रसंस्करण क्रांति ला दी है. उपयोगकर्ता के अनुकूल और कम समय का मैनुअल प्रसंस्करण होने के नाते व्यापार संगठन इसकी बाजार पहुँच का विस्तार करने में मदद करता है. इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के तरीके कुछ निम्नलिखित है.

(1) क्रेडिट कार्ड
(2) डेबिट कार्ड
(3) स्मार्ट कार्ड
(4) ई-पैसा
(5) इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर (ईएफटी)

ई-मनी का लेन-देन जहाँ भुगतान नेटवर्क पर किया जाता है वहीं राशि को एक बिचैलिए के किसी भी भागीदारी के बिना एक और वितीय स्वरुप में एक वित्तीय स्वरुप से हस्तांतरित हो जाता है. ई-पैसे के लेन-देन तेजी से हो रहे है, जो सुविधाजनक और समय की बचत है. ऑनलाइन भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या स्मार्ट कार्ड के माध्यम से किया गया भुगतान, ई-पैसे के लेन-देन के उदाहरण है.

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e-Commerce (ई-वाणिज्य) तथा पारम्परिक वाणिज्य क्या है एवं क्या है डब्ल्यूसीओ ?


ई वाणिज्य (e - commerce)


ई-वाणिज्य या इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य आधुनिक व्यापार की एक पद्धति है जो व्यापार संगठनों विक्रेताओं और ग्राहकों की जरूरत को कम लगात तथा माल और सेवाओ की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए वितरण की गति तीव्र करता है                                                                                                        
ई-वाणिज्य इन्टरनेट के माध्यम से व्यापार के संचालन में न केवल क्रय और विक्रय की प्रकिया है बल्कि ग्राहकों के लिए सेवाओ और व्यापार के भागीदारो के साथ सहयोग भी शामिल है अगस्त २०१७ में भारत यात्रा पर आये विश्व सीमा शुल्क संगठन के महासचिव कुनियो मिरुकिया ने बताया की डब्लूसी ओ सीघ्रही ई कॉमर्स पर दिशा निर्देश लायगा.

क्या है डब्ल्यूसीओ ?

इस संगठन की स्थापना वर्ष 1952 में सीमा शुल्क सहयोग परिषद् के रूप में की गई थी यह एक अंतर्सरकारी संगठन है डब्ल्यूसीओ का मूल उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में सीमा शुल्क प्रशासनो की प्रभावशीलता एवं कार्यक्षमता में वृध्दि लाना है सीमा शुल्क संगठन प्रतिनिधित्त्व 177 सदस्य देश है वर्ष 1994 में इसका नाम बदलकर विश्व सीमा शुल्क संगठन रख दिया गया.

विश्व सीमा शुल्क संगठन ई-कॉमर्स में बाधक चुनौतियों अवरूध्द करता है तथा विकासशीलं देशो को ई-कॉमर्स के लिए वातावरण प्रदान करता है.

पारम्परिक वाणिज्य बनाम ई-वाणिज्य

जब वस्तुओ को एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजकर विक्रय किया जाता है, तब उस सम्बन्ध के सभी कार्य पारम्परिक वाणिज्य के अन्दर समझे जाते है.

दुसरे शब्दों में, पारम्परिक वाणिज्य एक व्यक्ति (या संस्था) से दूसरे व्यक्ति (या संस्था) को सामनो का स्वामित्व अंतरण है. स्वामित्व का अंतरण सामान, सेवा या मुद्रा के बदले किया जाता है.

पारम्परिक वाणिज्य

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक जानकारी के आदान-प्रदान पर भारी निर्भरता.

संचार/लेन-देन तुल्यकालिक तरीके से किया जाता है. मैनुअल हस्तक्षेप प्रत्येक संचार या लेन-देन के लिए आवश्यक है.

यह स्थापित करने और पारम्परिक वाणिज्य मानक प्रथाओ को बनाए रखने के लिए मुश्किल है. व्यापार के संचार व्यक्तिगत कौशल पर निर्भर करता है.

पारम्परिक वाणिज्य के रूप में एक समान मंच की अनुपल्बधता निजी संचार पर काफी निर्भर करता है.

साझा करने के रूप में यह व्यक्तिगत संचार पर काफी निर्भर करता है जानकारी के लिए कोई सामान मंच नही होता

ई-वाणिज्य 

जानकारी साझा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक संचार, व्यक्ति जानकारी का आदान प्रदान करने के लिए व्यक्ति पर कम निर्भरता जिसने वाणिज्य को आसन बना दिया.

संचार या लेन देन अतुल्यकालिक तरीके से किया जा सकता है व्यक्ति के लिए संचार या लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के स्वचालित रूप द्वारा किया जाता है

एक समान रणनिति आसानी से स्थापित की जा सकती है. ई-वाणिज्य या इलेक्ट्रॉनिक बाजार में कोई मानवीय हस्तक्षेप नही है

ई-वाणिज्य (E-Commerce) दुनिया भर में वाणिज्यिक/व्यावसायिक का समर्थन करने के लिए एक सार्वभौमिक मंच प्रदान करता है.

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आउटसोर्सिंग क्या है ? भारत में आउटसोर्सिंग में करियर कैसे बनाये ? जानिए इस लेख में


आउटसोर्सिंग में करियर


उदारीकरण के पश्चात से भारत की आर्थिक स्थिती में निरंतर सुधार आता गया है और विश्व के नक़्शे में भारत अपनी प्रभावी उपस्तिथी अंकित करने में सफल रहा है यही कारन है की बहुरास्ट्रीय कम्पनियों की उपस्तिथी देश में दिखाई देने लगी है, विदेश निवेश को भी बढ़ावा मिला है और साथ ही रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होने लगे हैं, जिनमे आउटसोर्सिंग भी सामिल है कम खर्च में बेहतर आउटसोर्सिंग सुविधा उपलब्ध करने के कारन भारत कुछ वर्षो से आउटसोर्सिंग का हब बन चुका है जिससे इस छेत्र का स्कोप बढ़ता जा रहा है तथा आउटसोर्सिंग एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर के आया है आउटसोर्सिंग से सम्बंधित कार्य को कॉल सेण्टर के माध्यम से संचालित किया जाता है
                    
आउटसोर्सिंग का छेत्र पहले केवल बीपीओ तक ही सीमित था, लेकिन इसके अंतर्गत अब केपीओ , एलपीओ , पीपीओ जैसे कांसेप्ट भी सामनें आये हैं, जिनमे अभ्यार्तियों को अवसर मिलते हैं |

बीपीओ - बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण सेवाओ को किसी बाहरी संस्था को किसी खास उद्देश्य से हस्तांतरित किया जाता है | इसका सम्बन्ध डाटा एंट्री, प्रोस्सिंग कस्टमर सपोर्ट आदि से होता है
किसी भी स्ट्रीम से स्नातक बीपीओ सेक्टर में प्रवेश कर सकते हैं कुछ विसेस परिस्तिथियों  में तो 12वी उत्तीर्ण का चयन भी ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए कर लिया जाता है कंप्यूटर की बेसिक जानकारी हो तो इससे सम्बंधित तकनीक को समझाना आसन हो जाता है ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से बीपीओ की ट्रेनिंग ली जा सकती है हलाकि बीपीओ की ट्रेनिंग ली जा सकती है हलाकि नियुक्त करने वाली कंपनी भी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देती है वैसे तो अंग्रेज़ी भाषा में नियंत्रण इस छेत्र में सफलता में सहायक है, मार्किट की जानकारी हो, सोच पॉजिटिव हो , ग्राहकों को समझने की कला आपको आती हो और साथ ही बातचीत करने में आपकी दक्षता हो, तो आप बेहतर बीपीओ प्रोफेसनल बन सकते हैं |



एलपीओ – एलपीओ यानी लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग का सम्बन्ध कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने से है. इसके अंतर्गत कॉपीराइट, इंश्योरेंस कवर डाक्यूमेंट्स, लीगल रिसर्च, लीगल गॉइडलाइन आदि से सम्बंधित सुझाव दिए जाते है. लॉ ग्रेजुएट एलपीओ से संबंधित ट्रेनिंग लेकर इस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है अंग्रेजी में दक्ष होने पर इस क्षेत्र में भी आगे बढ़ा जा सकता है.

पीपीओ – पर्सन टू पर्सन आउटसोर्सिंग (पीपीओ) की कार्य प्रगति फ्रीलांसिंग जैसी होती है इसके अंतर्गत प्रोफेशनल को किसी कम्पनी के लिए कार्य करना होता है, जिसके लिए उसे एक निर्धारित राशि पारश्रमिक के रूप में दी जाती है. पीपीओ में ऑनलाइन ट्यूशन, एकाउन्टिंग फीचर राईटिंग, होम डिज़ाइनिंग, सॉफ्टवेयर राईटिंग तथा कंसल्टेन्सी जैसे कार्य मिलते है.

अवसर – प्रशिक्षण के पश्चात् अभ्यर्थी कॉल सेंटर में उपलब्ध रिक्तियां के लिए आवेदन कर सकते है. लगभग सभी बड़े शहरों, जैसे – दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, बेंगलुरू, गुडगाँव, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे आदि में कॉल सेंटर है, जहाँ आउटसोर्सिंग प्रोफेशनल की मांग होती है समाचार पत्र, जॉब वेबसाइट या कंसल्टेंसी सर्विस की सहायता से इस क्षेत्र से सम्बंधित नौकरी ढूंढी जा सकती है.

वेतनमान – इस क्षेत्र में प्रारम्भिक वेतन 20 से 25 हजार के मध्य होता है दो-तीन वर्ष के अनुभव के पश्चात् 35 से 50 हजार के मध्य वेतन आसानी से मिल जाता है.








    








    

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